Sunday, November 4, 2007

कैसी िदवाली िकसकी िदवाली


िदवाली अा गयी है इसे उत्सव का शक्ल िदया जा रहा है। पर एक सवाल है यह कैसी िदवाली है । िकसकी िदवाली है । क्या यह िदवाली िवदर्भ के िकसानाें के िलए काेइ संदेश लेकर अायी है या िफर बस्तर व संताल के अािदवािसयाें के घर काे राेशन करने कीकाेइ चर्चा हाेने की अास है । उल्टे एक केंदर्ीय मंत्री िवदर्भ जाकर वहां के िकसानाें काे कािहली का पर्माणा पृ दे अाए । पीएम व िवत्त मंत्री नाै पर्ितशत िवकास दर की बात करते नहीं थक रहे हैं जबिक दूसरी अाेर गरीबी लाचारी अाैर बीमारी भारत के गांवाें की तसवीर काे लगातार बदतर करती रही है ।


यमुना
की बदबू अाैर िदल्ली वालाें की खुशबू


िदल्ली की पहचान यमुना है । यमुना के तट पर ही िदल्ली जन्मी। पली बढी। पर अब यही िदल्ली जमुना काे माैत की नींद सुलाने पर अामदा है। पावन यमुना अाज बदशक्ल अाैर अपनी बदबू के िलए जानी जाती है । अाइटीअाे पुल से जब लाेग ल‌क्छमी नगर के िलए वाहनाें पर बढते हैं ताे कइ बार कपडे से नाक ढक लेते है । पर यमुना की यह बदबू अायी कहां से । इससे इतर खाये िपये अघाये िदल्ली वाले के शरीर से बनावटी खुशबू अाती है । इसी खुशबू काे यमुना काे बदबूदार करने की शर्त पर ही हािसल िकया गया है। यह एक गहरे िवमर्श व मंथन का िवषय है िजसपर लंबी बहस छीड सकती है।

2 comments:

Prem said...

अच्छी कोिशश है जारी रखें.....नए ब्लाग के िलए आपकों बधाइयां...

bhupendra said...

bhai sahab kya likha hai kripyaya jari rakkhe. aacha hai.